वो

Posted: April 3, 2014 in Uncategorized

वो चित्र कभी चित्र नहीं हो सकता जो कभी तुम्हें और तुम्हारे संवेदनाओं को झकझोरे ही न । वो कविता, कविता कभी नहीं हो सकती जो तुम्हारे कानों को सुरसुरी दे जाए । वो गीत, गीत कभी नहीं हो सकते जो तुम्हारे ताल को एक सीमित लय में बांधे । वो नृत्य, कभी नृत्य नहीं हो सकता जो तांडव न बन पाये , वो अभिनय, कभी अभिनय नहीं हो सकता जो अभिनेता और पात्र के आपसी संघर्षों को उजागर न करें ।

 

राजकुमार,

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